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सुप्रीम कोर्ट ने प्रवासी मजदूरों के हितों में जारी किए चार मुख्य आदेश

देश में प्रवासी मजदूरों के पलायन पर सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी 28 मई 2020 को कुछ अहम निर्देश जारी किए हैं , प्रवासी मजदूरों की ताजा हालत को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि बस या ट्रेन का किराया ना लिया जाए। कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि यह खर्च राज्य सरकारों को ही उठाना होगा, साथ ही फंसे हुए मजदूरों के खाने पीने का बंदोबस्त भी राज्य सरकारों को ही करना होगा। इस मसले पर अगली सुनवाई अब 5 जून को की जाएगी (MIGRANT WORKERS HEARING TODAY LATEST NEWS UPDATES ON SUPREME COURT)।

इस मामले की सुनवाई देश के तीन बड़े जजों द्वारा की गई। इनमें जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एसके कौल और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने गुरूवार को इस मामले पर सुनवाई करते हुए 4 टिप्पणियां और 4 आदेश दिए।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश (MIGRANT WORKERS HEARING TODAY LATEST NEWS UPDATES ON SUPREME COURT)

  1. सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया कि बसों और ट्रेनों से सफर करने वाले मजदूरो से किराया ना लिया जाए। यह खर्च राज्य और केंद्र शासित प्रदेशो की सरकारें उठाएं।
  2. स्टेशनो पर खाना पीना मुहैया कराने की जिम्मेदारी राज्य सरकारो को सौपी गई और यात्रा के दौरान खाने की जिम्मेदारी रेलवे को दी गए। यह भी मुफ्त किया जाएगा।
  3. बसो के इंतजार में फंसे हुए मजदूरों के खाने पीने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की ही होगी। मजदूरों को खाना कंहा मिलेगा और रजिस्ट्रेशन कंहा होगा इसकी जानकारी भी प्रसारित करने का आदेश भी दिया गया है।
  4. राज्य सरकारों को यह भी आदेश दिया गया है कि सरकारें रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को देखें और यह भी सुनिश्चित करें की मजदूरों को घर जाने के लिए जल्द से जल्द ट्रेन या बस मिल जाए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां

  • सुप्रीम कोर्ट की तरफ से यह भी कहा गया कि राज्य सरकारों ने मजदूरों के लिए बहुत से काम किए हैं, लेकिन रिजस्ट्रेशन, ट्रांसपोर्टेशन और खाना पीना मुहैया कराने के मामलों में  खामियां देखी गई हैं।
  • केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर  जनरल तुषार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह कहा कि अब तक 91 लाख  मजदूरो को घर पंहुचा दिया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि क्या उन्हे यात्रा के दौरान पेट भर के खाना मिला।
  • सुप्रीम कोर्ट द्वारा तुषार  मेहता से सवाल पूछे गए कि क्या प्रवासी मजदूरों से टिकट के पैसे लिए गए, सवाल यह है कि राज्य सरकारे रेलवे को पैसा कैसे चुका रही हैं। अगर प्रवासियों से किराया लिया गया तो क्या उन्हे पैसे वापिस किए जा रहे हैं, क्या ट्रेन का इंतजार करने वाले लोगों को खाना मिल रहा है या नहीं। कोर्ट ने कहा है कि मजदूरों को खाना मिलना ही चाहिए। इस पर तुषार मेहता ने कहा हां मजदूरों को खाना दिया जा रहा है।
  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि हर रोज करीब 3 लाख 36 हजार प्रवासियों को घर पंहुचाया जा रहा है। अदालत ने इस पर कहा कि बहुत से जरूरत मंदों को फायदा नहीं मिल पा रहा।
Nishant

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