पिछले 10 सालों में 2.50 लाख से ज्यादा लोगों ने बीमारी से तंग आ कर दी जान, हेल्थ बजट में हुआ 175% का इजाफा

कोरोना वायरस के दौरान पैदा हुए हालातों ने हमारे देश नहीं बल्कि पूरी दुनिया की स्वास्थ्य विभाग को नाको तले चने चबाने पर मजबूर कर दिया है, देश दुनिया के हालात इतने बुरे हैं कि आए दिन हजारों लोग कोरोना वायरस के कारण मर रहें है और सरकारों द्वारा अपनाए जा रहे कदम मौत की गति को धीरे तो कर रहे हैं, लेकिन रोक नहीं पा रहे। कोरोना का पहला मामला भारत में 30 जनवरी को आया था और इसी के 4 दिन बाद संसद में बजट पेश किया गया था, जिसमे हेल्थ पर पिछले साल के मुकाबले 3 हजार करोड़ रूपए अधिक खर्च करने का ऐलान किया गया था, लेकिन फिर भी हर साल ना जाने कितने ही लोग बीमारियों से तंग आ कर या तो जान दे देते हैं या फिर इलाज ना हो पाने के कारण उनकी मौत हो जाती है(HEALTH BUDGET INCREASED BY 175 PERCENT IN LAST 10 YEARS) ।

सरकार द्वारा जारी किया गया हेल्थ बजट

अगर देश के हेल्थ पर खर्च होने वाले बजट की बात करें, तो यह बजट पिछले 10 सालों में 175 प्रतिशत बढाया गया है(HEALTH BUDGET INCREASED BY 175 PERCENT IN LAST 10 YEARS)। अगर बात करें  2019-2020 की तो तब हेल्थ बजट 64,609 करोड़ रूपए था, जबकि 2020-2021 में यह बजट 67,112 करोड़ रूपए कर दिया गया। अगर इस लिहाज से यह देखा जाए कि सरकार हर साल प्रति व्यक्ति की सेहत पर कितना पैसा खर्च करती है, तो निकल कर आती है 1657 रूपए की रकम, यानी भारत में रहने वाले हर व्यक्ति की सेहत का ख्याल रखने के लिए सरकार 4.50 रूपए खर्च कर रही है।

यह तो था जो पैसा सरकार खर्च करती है, अब अगर बात करें जनता की तो साल 2016-2017 में लोगों ने अपनी खुद की जेब से 3 लाख 40 हजार 196 करोड़ रूपए खर्च किए थे। लेकिन बावजूद इस सबके भारत में बीमारी से तंग आ कर आत्महत्या करने वालें लोगों की संख्या में एक भारी इजाफा हुआ है।

अगर साल 2018 की बात करें तो पता चलता है कि इस साल में करीब 23,764 लोगों ने बीमारी से तंग आ कर आत्महत्या कर ली वंही अगल साल 2009 से 2018 की बात करें तो इस बीच करीब 2.50 लाख लोगों ने केवल बीमारी से तंग आ कर आत्महत्या कर ली (HEALTH BUDGET INCREASED BY 175 PERCENT IN LAST 10 YEARS)।

सरकार को नियमों में  करने चाहिए कुछ बदलाव

इन सब आकड़ों को देख कर यह तो नहीं कहा जा सकता कि सरकार स्वास्थ्य विभाग पर पैसा खर्च नहीं करती, बस अगर दिक्कत कोई नजर आती है तो यह कि लोगों को समय पर इलाज की सुविधा मिल जाए, अगर ऐसा होता है तो ना केवल वह भयंकर बीमारियों से बचेंगे बल्कि स्वास्थ्य पर खर्च भी कम होगा।

Nishant

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